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क्या आपको पता है पर्यावरण के करीब जाने के 5 फायदे ।

पर्यावरण-के-करीब-जाने-के-५-फायदे

यूँ तो देखा जाये तो गुलज़ार साहब की इस शायरी का मतलब जीवन के बहुत से पहलुओं से जुड़ा हुआ है । पर सीधे तौर पर देखें तो वे यह कहते है कि अगर अपनी मंज़िल तक पहुंचना है तो अपने बनावटी ऐशो आराम से दूर आना होगा। हमें लगता है कि अगर हम बिना रुके अपने काम में लगे रहे तो ही हमें सफलता प्राप्त होगी परन्तु हम इस बात को भूल जाते है कि हमारा शरीर भी एक तरह का यंत्र है। ऐसा यंत्र जिससे पर्यावरण में जा कर ईंधन को वापस से भरवाना पड़ता है ।


एकाग्रता में वृद्धि

रेचल कप्लान और स्टेफेन कप्लान की अटेंशन रेस्टोरेशन थ्योरी के अनुसार पर्यावरण के साथ समय वयतीत करने से हमारी एकाग्रता की क्षमता में वृद्धि होती है। आपने बहुत बार महसूस किया होगा कि बहुत दिनों तक लगातार काम करने के बाद हमारा मन चिढ़चिढ़ा हो जाता है। काम में हमारा मन नहीं लगता, ऐसे में पर्यावरण हमारे लिए साहयक बनता है। पर्यावरण के करीब जाने से हम फिर से अपने काम के प्रति एकाग्रता दिखा पाते है।


विटामिन डी की कमी

सूरज की कुछ किरणों का शरीर पर पड़ना आवश्यक होता है। पर्यावरण के करीब जाने से सूरज की किरणों से विटामिन डी हमें मुफत में प्राप्त हो जाता है। यह विटामिन – डी हमारे हड्डियों को मज़बूत करता है, जिससे हम शहर की भागदौड़ में अछूते रह जाते है।


खुद के लिए अमूल्य समय

लेखक “पैट्रिक रोथ्फुस” का कहना है कि एक लम्बी सड़क आपको अपने बारे में १०० साल की ख़ामोशी से ज्यादा सीखा सकती है। हमारे दिनचर्या में हम इतना व्यस्त होते है कि बस घड़ी की सुइयों के पीछे भागते रहते है। ऐसा लगता है कि मानो ये कोई प्रतिस्पर्धा है हमारे और घड़ी के बीच। पर्यावरण के करीब जा कर ही हमें हमारे बारे में हर सच का आभास होता है कि हम कितने खुश है, ऐसा क्या है जो हमें परेशान कर रहा है।


मनोरंजन का साधन


यह बात तो हम सब जानते है कि जिसे हम मनोरंजन मानते है, वास्तव में वह चीज़े हमारे लिए हानिकारक है। इनके कुछ उधारण हुए फ़ोन, टेलीविज़न, सोशल मीडिया, इत्यादि। इनका असर अब सिर्फ सेहत पर नहीं रिश्तों पर भी पड़ने लगा है। पर्यावरण के करीब जा कर हम रिश्तों के भी करीब जाते है। पर्यावरण क बीच खेल कूद करने से हमारे आपस में बिताये समय से एक विश्वसनीय और अटूट रिश्ता पनपता है।


प्रकृति के बारे में रोचक बातें

पर्यावरण के करीब जा कर हमें कुछ अद्भुत दृश्यों का नज़ारा देखने को मिलता है। कुछ सूंदर झील, उनकी खासियत, कुछ ऐसे प्राणी जो शयद किताबों में भी नहीं। जैसे इलेक्ट्रिकल इल नामक मछली 600 वाल्ट तक की बिजली को अपने अंदर समाने की क्षमता रखती है। या कीवी पक्षी अंधे होते है।


ऐसे बहुत से और भी फायदे है। पर सबसे ज़रूरी बात यह है कि हम ये ना भूले कि मनुष्य भी प्रकृति का हिस्सा है। ऐसा नही है कि मनुष्य प्रकृति से बढ़ कर है। मनुष्य और प्रकृति में वही स्नेह होना चाहिए जो एक माँ और उसके बच्चे में होता है क्योंकि मनुष्य प्रकृति से जन्म लेता है। ऐसा न हो कि बाद में हम अपने आपको यह कहावत सुनाये कि अब पछतावत होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत।


अनुप्रिया मिश्रा

अनुप्रिया मिश्रा, वो नाम जो हज़ारों की भीड़ में खोना नहीं बल्कि उस भीड़ का एक हिस्सा बनकर खुद की काबिलियत को निखारना चाहता है। राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त अनुप्रिया हमारी वेबसाइट से जुड़कर अपनी रचनात्मकता और बेहतरीन लेखनी को पाठकों के सामने लाने और एक उम्दा युवा ब्लाॅगर के रूप में अपनी पहचान कायम करने की क्षमता रखती हैं। ज़िंदगी, लोगों और इस दुनिया को बेहद मानवीय, प्रेमपूर्ण एवं अपने विशेष नज़रिए से देखने की इनकी सलाहियत ही इनकी लेखनी को सृजनात्मक एवं पाठक सुलभ बनाती है।