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सोशल मीडिया से संबंध विच्छेद – Scoutripper

इंस्टाग्राम पर मेरे बहुत कम फ़ॉलोवर्स हैं। मैं उनकी संख्या दोगुनी किस प्रकार कर सकता हूँ।

उसकी वेबसाइट कितनी सुंदर है और वह कितने मज़े से ब्लॉग लिखती है। यार, काश़ मैं भी अपने दोस्त की तरह वायरल कंटेंट बना पाता।

मैं जानता हूँ कि जब आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट को लॉग इन करते हैं तो आपके मस्तिष्क में यही सब विचार चल रहे होते हैं। आज हम अपना ज़्यादातर समय फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर ज़्यादा बिताते हैं। हम लगातार अपने अकाउंट पर लॉग इन रहते हैं या फिर हम अपने पेज पर हुए किसी भी तरह के नए फीड को ढूंढने की कोशिश में लगे रहते हैं। हम क्या कह सकते हैं, सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी पर राज कर रही है और इसे चला रही है।


सोशल मीडिया की लत

लोगों से लगातार जुड़े रहने और अपनी पर्सनल लाइफ़ की चीज़ें उनसे शेयर करने की धुन अच्छी और बुरी अर्थात लाभकारी और हानिकारक दोनों है। कुछ लोग सोचते हैं कि ये परिवार और दोस्तों को क़रीब लाती है जबकि कुछ का मानना है कि यह जलन और कंपटीशन को जन्म देती है। जो भी हमारे दोस्तों ने किया हुआ है वो सब हमें भी करना होता है, इसलिए नहीं कि हमें उसकी ज़रूरत है बल्कि इसलिए क्योंकि हमें लालच होता है।


हालाँकि चीज़ें बदल रही हैं। मैं ऐसे बहुत से लोगों को देख रहा हूँ जो अपने सोशल मीडिया अकाउंट को ये कहते हुए बंद कर रहे हैं कि बस बहुत हो गया। मैं अपनी ख़ुद की बात करूँ तो मैंने अपना फ़ेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया क्योंकि मैं इससे तंग आ गया था। मैंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बंद करने के लिए भी ख़ुद को लगभग तैयार कर दिया था क्योंकि ईमानदारी से पिछले साल आया एल्गोरिदम इंस्टाग्राम कुछ ऐसा है जिसने मेरे लिए इस ऐप को एंज्वॉय करना मुश्किल बना दिया।

अगर आप को मेरा काम पसंद आया और आप भी ऐसा करने का सोच रहे हैं तो आपको ये जानना कि ‘सोशल मीडिया से ब्रेक क्यों’, काफ़ी लाभ पहुँचा सकता है!


आप स्वयं पर और ज़्यादा ध्यान देना शुरू कर देंगे

वैसे तो आज फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम का मतलब अपने दोस्तों पर नित्य नयी अपडेट्स की बौछार करना बन चुका है और आप ये करते भी रहते हैं। आपके लिए एक ख़बर है और वो ये है कि किसी को इस चीज़ की परवाह नहीं है। सोचिए, आपके पास आपके दोस्तों के बहुत अच्छे अच्छे फोटोग्राफ्स हैं। हालाँकि आपको उनके लिए काफ़ी ख़ुशी हो सकती है लेकिन ये भी हो सकता है कि उन फोटोज को देखकर आप अपनी योग्यताओं और क्षमताओं पर संदेह करने लगें। इसलिए सोशल मीडिया से दूर जाना ज़रूरी है।


आप जीती जागती चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान दे पाएंगे

आपको अपने सोशल मीडिया अकाउंट के लिए ढलते हुए सूरज की तस्वीरें लेना ज़्यादा पसंद है या फिर आप ख़ुद बैठकर इस मंज़र को देखना चाहोगे! सोशल मीडिया ने हमें हर एक चीज़ की तस्वीरें लेने की आदत डलवा दी है, बजाय इसके कि हम इन जीती जागती चीज़ों को अपनी यादों में संजोकर रखें, हम इन्हें अपने कैमरे में क़ैद कर लेते हैं। अगर हम सोशल मीडिया से दूर जाते हैं तो हम इन जीती जागती चीज़ों को सही मायनों में इंजॉय कर सकेंगे।


आपकी ज़िंदगी का एक सर्कस बनने से बच जाएगी

हममें से ज़्यादातर लोग लगातार कंटेट्स को बनाने के नए नए तरीक़े खोजने में लगे रहते हैं। अपना पैसा अच्छा अच्छा खाना खाने में ख़र्च करते हैं, छुट्टियां बिताने के लिए महँगी जगह का चुनाव करते हैं और ख़ूब सारी शॉपिंग करते हैं ताकि हम लोगों को ये दिखा सकें कि हम अपनी ज़िंदगी को उत्तम तरीक़े से जी रहे हैं। जब आप सोशल मीडिया से थोड़ा सा अलग हटते हैं तब आप ये पाते हैं कि वास्तव में इन चीज़ों का कोई महत्व ही नहीं है। हो सकता है कि आप ज़्यादा से ज़्यादा पैसे बचाने की कोशिश भी शुरू कर दें।


आपको काफ़ी ज़्यादा ख़ाली समय मिल जाएगा

मुझे लगता है कि सोशल मीडिया से ब्रेक लेने का सबसे महत्वपूर्ण फ़ायदा यही है। ज़रा सोचिए, आप अपने अकाउंट को बेहतर बनाने हेतु एक प्रेरणा की खोज के लिए लगातार दूसरों के अकाउंट स्क्रॉल करते रहते हैं, आप हमेशा अपने कंटेंट को एडिट करते रहते हैं ताकि वह उत्तम दिख सके और सही बात कही जाए तो आपको फॉलोअर्स बढ़ाने की चिंता के चलते समय तो मिल ही नहीं पाता है। ज़रा सोचिए कि वो पल जब ये सारी चीज़ें बंद हो जाएगी तो आपको अपने लिए कितना ज़्यादा समय मिल जाएगा। आपके पास पार्क में टहलने का समय होगा, आपके पास दौड़ने का समय होगा, चीज़ें ख़रीदने का समय होगा, दोस्तों से मिलने का समय होगा आदि आदि।


आप कम्पटीशन की भावना कम करना सीखेंगे

सोशल मीडिया से दूर हो जाने का सबसे महत्वपूर्ण फ़ायदा ये है कि आप कम कंपटीशन की भावना को सीखेंगे। आपको नई नई पोस्ट डालकर दूसरों से मुक़ाबला नहीं करना पड़ेगा, आपको अपने दोस्त से इस चीज़ का मुक़ाबला नहीं करना पड़ेगा कि किसके ज़्यादा फॉलोअर्स हैं और आपको बेहतर बनने के मुक़ाबले को भी नहीं सहना पड़ेगा। आप ये एक्सेप्ट करना सीखेंगें कि कुछ लोग वायरल चीज़ें बनाने में आपसे बेहतर हैं और ये ठीक है।आप ये सीखेंगे की ज़िंदगी का मतलब सोशल मीडिया का दौड़ता चूहा बनकर रहना नहीं है बल्कि छोटी छोटी चीज़ों में खुशियाँ ढूँढना है।


तो अगर आप ये पाते हैं कि आप अपनी ज़िंदगी को इन्जॉय नहीं कर रहे हैं या आप ये देखते हैं कि आप ऐप्स के पीछे घंटों बिता देते हैं तो ये अच्छा रहेगा कि आप रुके और ख़ुद से पूछे कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? सोशल मीडिया से ब्रेक लेना निश्चित रूप से आपकी काफ़ी मदद करेगा और यद्यपि पहले तो ये काफ़ी मुश्किल प्रतीत होगा लेकिन मुझे यक़ीन है कि बाद में आप भी इस चीज़ को आसानी से कर लेंगे।